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नौकरी

# नौकरी अच्छा नौकरी शब्द सभी को अच्छा लगता है आखिर अच्छा लगे भी क्यों नही ? ये एक परिवार,दोस्त और अपनो को खुशियां देने वाला शब्द है वही जिसे नौकरी मिली है उसकी जीवन के सपनो को साकार करने वाला शब्द है..!! हर कोई नोकरी के लिए कठोर मेहनत करता है चाहे वो प्राइवेट नोकरी हो या सरकारी लेकिन ये दोनो ही हर किसी के नसीब में नहीं होती है। नोकरी के लिए जितनी मेहनत करते है उतनी ही कम लगती है क्योंकि कंपीटीशन उतना ही ज्यादा हो गया है कई बार दरवाजे पर दस्तक देकर वापस चली जाती है तो कई बार बिना मेहनत के भी मिल जाती है। खैर दोनो के अपनी मेहनत और लग्न छुपी हुई होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है जो व्यक्ति नोकरी करता है क्या वो अपनी नोकरी के पूर्ण रूप से खुश है शायद नही..... देखिए नोकरी चाहे कैसी भी हो परिवार से जुदा करवा देती है तुम्हे परिवार से अलग रहने को मजबूर कर देती है परिवार के साथ 2 वक्त का समय निकालने के लिए तरसना पड़ता है..!! ऐसा जरूरी नहीं सभी के लिए हो किसी की नौकरी परिवार के साथ रहते हुए भी पूरी होती लेकिन वे कुछ प्रतिशत ही है अधिकतर लोग अपने परिवार को किश्तो में ही टाइम दे पाते है। ...

राजपूतो ने मुगलों को अपनी बेटी दे कर बचाए थे राज्य

क्षत्रिय(राजपूत) जो अपने गौरवशाली इतिहास की बात करते है उनके इतिहास पर थोड़ी नजर डाल लिया जाए जो अकबर का इतिहास मिटाने की बात करते है उन्होंने अपनी बेटियां दे कर अपना साम्राज्य बचाया था ।। 1- जनवरी 1562, अकबर ने राजा भारमल की बेटी से शादी की. (कछवाहा-अंबेर) 2-15 नवंबर 1570, राय कल्याण सिंह ने अपनी भतीजी का विवाह अकबर से किया (राठौर-बीकानेर) 3- 1570, मालदेव ने अपनी पुत्री रुक्मावती का अकबर से विवाह किया. (राठौर-जोधपुर) 4- 1573, नगरकोट के राजा जयचंद की पुत्री से अकबर का विवाह (नगरकोट) 5-मार्च 1577, डूंगरपुर के रावल की बेटी से अकबर का विवाह (गहलोत-डूंगरपुर) 6-1581, केशवदास ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से किया (राठौर-मोरता) 7-16 फरवरी, 1584, राजकुमार सलीम (जहांगीर) का भगवंत दास की बेटी से विवाह (कछवाहा-आंबेर) 8-1587, राजकुमार सलीम (जहांगीर) का जोधपुर के मोटा राजा की बेटी से विवाह (राठौर-जोधपुर) 9-2 अक्टूबर 1595, रायमल की बेटी से दानियाल का विवाह (राठौर-जोधपुर) 10- 28 मई 1608, जहांगीर ने राजा जगत सिंह की बेटी से विवाह किया (कछवाहा-आंबेर) 11-पहली फरवरी, 1609, जहांगीर ने राम चंद्र बुंदेला की ...

कला या चमत्कार

कला या चमत्कार अच्छा आप लोगो ने जीवन में कही न कही हाथ देख कर भविष्य बताने वाले तो अवश्य देखे होंगे । वे 10 मिनट में हाथ देख कर भविष्य बता देते है ये उनकी कला है और इसे चमत्कार समझ लेना ही मंदबुद्धिता को दर्शाता है || सबसे अच्छा सेल्समैन आपने ट्रेन / बस में देखा होगा जिन्हे कोई ट्रेनिंग नही देता वे आपको 10 मिनट में इतना कुछ बता देते है की आप मन एक बार तो करता ही है की ये चीज ले लेनी चाहिए  उनकी एक खास बात आपने नोटिस की तो वे चेन को घिस कर बताते है की इसका कलर नही जाता वही उसे पता होता है कि उसकी चेन नही बिकेगा या ये व्यक्ति नही लेगा फिर भी सबको चेक करवाते है ये उनकी एक कला है। कला का उदाहरण तो आप बीमा वाले से भी ले सकते है जीने से ज्यादा मरने के फायदे बता देते है ये भी उनकी कला है को वे अपनी सर्विस को कैसे बेचते है ?? गांवो में जादू के खेल दिखाने वाले मदारी तो बहुत देखे होंगे वे लड़के को गायब करके सांप बना देते है तो कभी रेडियो टीवी तक निकाल देते है वो उसकी कला है हम समझ नही पाते और उसे जादू समझ बैठते है जबकि वो अपनी कला का चालाकी से  प्रदर्शन करता है।  अच्छा थोड़े दिन पह...

बस का सफर

आज ऑफिस से घर जाने के लिए देर हो रही थी इसलिए मैं जल्दी-जल्दी ऑफिस से घर के लिए निकल पड़ा. मेरा ऑफिस घर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है और मुझे वहाँ पहुचनें के लिए उत्तम नगर से रोज बस पकड़नी पड़ती है. आज में बस स्टॉप पर थोड़ा देर से पहुँचा था और मेरी निगाह 817 नंबर वाली बस जा चुकी थी. कुछ ही पल में एक बस आई और मैं उसमें चढ़ गया. आज बस में काफी ज्यादा भीड़ थी. बड़ी मुश्किल से मुझे बैठने के लिए थोड़ी सी जगह मिल पाई. बस रवाना हो चुकी थी और मैं अपने कान में लीड लगाकर गाने सुनने का मन करने लगा फिर भीड़ को देख कर मोबाइल निकालने की हिम्मत नही हुई क्योंकि मोबाइल चोरी के किस्से मैने बहुत सुन रखे थे.!! यहां कब मोबाइल,पर्स और पैसे गायब हो जाए पता नही लगता इस क्षेत्र में चोर बहुत ज्यादा है। इसलिए मोबाइल जेब पड़े रहने देना ही मैने ठीक समझा ।। मेरे मन में तरह-तरह के विचारों ने उथल पुथल मचाना शुरू कर दिया. बस और रेल का सफर करनें पर असली भारत के दर्शन होते हैं, यहीं पर ही भारत की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक स्थिति का वास्तविक पता चल पाता है. इनमें ही अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, हिन्दू-मुस्लिम आदि सभी ध...

अच्छा हम इतने फ्री है

अच्छा हम इतने फ्री है आपको नही लगता की हम अब इतने फ्री हो चुके है की फेसबुक पर सारे दिन बकचोदी कर लेते है,बहस भी उन मुद्दों पर कर लेते है जिनकी हमे जानकारी तक नही होती है, कई बार तो मैं तो सोचता हु यदि फेसबुक नही होती तो इतने विद्वान ,विदुषी अथवा स्याने लोगो से डिजिटल मुलाकात कैसे होती ?? हम आजकल क्रिकेट पर ज्ञान बांटने लगते है तो कभी हम देश की अर्थव्यवस्था को फेसबुक पर पोस्ट डालकर चांद पर ले जाते है । वही दूसरी और देखा जाए तो चंद लोगो को केवल हिंदू मुसलमान करने के लिए छोड़ रखा है।  खैर छोड़ो कुछ लोगो को देखकर ऐसा लगता है मानो जैसे किसी पार्टी अथवा नेता ने भाड़े पर रखा हुआ है वे तो मानो जैसे पालतू जानवर की तरह अपने मालिक के हुकम का इंतजार करते है और उन्ही कहे अनुसार अपने कदम उठाते है। आजकल फेसबुक पर देखो तो सबको एक ही काम नजर आता है वो है #HD 🤣 वाह नाम सुन कर वस वही पहुंच गए होंगे ख्यालों में पहुचोगे क्यों नही जब सारे दिन यही देखते और लिखते रहते हो।  इनमे से आधे तो केवल चंद लाइक कमेंट के लिए डालते है और पुरानी वीडियो को ही उल्ट फेर करते रहते है खैर हम क्या लेना देना है ? हम त...

इश्कग्राम या इंस्टाग्राम की एक सच्चाई

आप सभी को मेरा ये अत्यंत बकवास और सत्यता से भरा लेख झेलने की हिम्मत प्रदान करें!  कुछ लोगों को बुरा भी लग सकता है, तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं होंगी क्यूंकि मेरा मानना है की जो लोग अच्छे होते है उन्हें सब जगह अच्छाई ही नजर आती है और जो लोग बुरे होते है उन्हें सब बुरा ही लगता है, इसलिये आप स्वयं चयन करें की अच्छे है की बुरे तो मैं क्या बता रहा हु, सच मे इतनी बकचोदी करते है फेसबुक पर की अलसी मतलब असली बात याद नही रहती ।। अच्छा आजकल सोशल मिडिया के सबसे चर्चित प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ( इंस्टाग्राम नाम से तो सब परिचित ही होंगे ना, ये कोई बताने जैसे बात तो है नहीं की इंस्टाग्राम पर चैट की जा सकती है, वीडियो कॉल की जा सकती, वो भी सुन्दर का मुखौटा लगाकर, मेरा मतलब है फ़िल्टर ", दुनियां जहान के वीडियो देखे जा सकते है भाभियों की रील्स, टुंडी कनिया को आसानी से अपलोड भी किये जा सकते है, यहाँ तक की ऑनलाइन आशिकी भी की जा सकती है) का अब ये रील्स मे मीणाओ की नारियों की चर्चा करने वाला हु क्यूंकि ये ना आज कल दुनियां मे ऐसी छाई हुई है की भारत का नाम इतना ऊंचा हो गया की चीन की दीवार की जगह अब अंतरिक्...

मेरे गांव का चतर

मेरे गांव का चतर ये कोई कहानी नहीं है बल्कि एक प्रेरणा है जो हमे संघर्ष की और प्रेरित करती है । टोडाभीम से गुढ़ाचन्द्रजी मार्ग पर अरावली पर्वत मालाओं की तलहटियों में बसा छोटा सा गांव है! गांव की बसावट पहले पहाड़ों के मध्य हुआ हुआ करती थी जो की तीन दिशाओं से घिरा हुआ था लेकिन खेती के लिए दूर होने के कारण लोग अपने अपने खेतों में रहने लगे और आज पूर्व स्थान को छोड़ कर डूंगर की तलहटियों में आ बसा है। गांव आधुनिक सुख सुविधाओं से परिपूरित है गांव में पानी पर्याप्त मात्रा में पूर्ति होने के बजह से खेती ही गांव के लोगो की जीविकोपार्जन है। गांव में सभी साधारण परिवार थे कुछेक सक्षम परिवारों को छोड़ कर और उन्ही मे से एक चतर का घर भी था बहुत साधारण और पुराने तरीके से बना हुआ । दो गह पाटोड जो की कली से पुती हुई और गोबर से लेपी हुई जो की गांवों में बड़ी आसानी से मिल जाया करती है। चतर के पिताजी बचपन से ही मेहनती रहे है उन्होंने डूंगर से पत्थर खोद कर इन्हे पढ़ाया लिखाया । एक बात तो मैं बताना ही भूल गया चतर और अशोक दो भाई है लेकिन अशोक अधिकतर मामा के यहां रहा था जिसकी वजह से गांव में बहुत कम ही रहा है। ...